नारद: असीम कार्टून मत बनाओ, शहीद समाधी स्थल तोड़ो

Wednesday, September 12, 2012

असीम कार्टून मत बनाओ, शहीद समाधी स्थल तोड़ो


अबे असीम,  हत्यारे को हत्यारा कहोगे तो तो हत्यारा तुम्हारी हत्या तो करेगा ही, खासकर उस हाल में जब हत्यारा  गुप्त रूप से सुपारी लेता हो ...वो "सार्वजानिक गुप्त"  मामले को सार्वजनिक करने की क्या  जरुरत थी ?? 

ख्वामखाह फस गया न ??  कोई कुछ नहीं बोलेगा, कोई निंदा नहीं , कोई बहस नहीं. अरे कान के कच्चे आँख के अंधे, मुंबई "हमला सांस्कृतिक कार्यक्रम " से नहीं सीखा क्या ?? ले रहा है  कोई उसका नाम जिसने शहीदों के सीने पे लात  मारी थी ?? मरे हुए को प्रताड़ित करने पे कोई बवेला नहीं है, बस थोड़ी बहुत डिटेंशन, थोडा बहुत अटेंशन. कोई टी वी वाला दिखा रहा है ?? उसका क्या  हुआ ?? जेल गया की नहीं गया ?? सजा क्या होगी ?? हो रही है कोई बहस ??  होगी भी नहीं. कहावत है "गड़े मुर्दे उखाड़ने  से क्या  फायदा ??" अरे मुर्दों के स्थल पर लात मारने वाले के बारे में बहस करने से क्या फायदा ? भले ही वो हमें जिन्दा रखने के लिए मुर्दे हो गए.  

एक तो तेरे नाम के साथ सरनेम है "त्रिवेदी" ऊपर से कार्टूनों का कार्टून बनाने का अपराध ?अबे  गधे को गधा कहोगे तो गधा तो दुलात्तिये  न मारेगा जी?? 

अबे अज्ञानी, विरोध प्रकट करने के और भी कई तरीके है, सुन अगली बार जब विरोध प्रकट करने का मन करे तो  देवी देवताओं के कार्टून बना, बुध्दजीवी भाई चारा में आयेंगे तुझे बचा ले जायेंगे, मिडिया भी बदनाम न कर पायेगी. उलटे तुमको भाई चारा का वाहक घोषित कर दिया जायेगा. लेकिन ध्यान रहे वो भी सिर्फ हिन्दुवों की, गलती से इस्लाम  का बना दिया तो पकिस्तान से घोषित सजा का भी  भारत में वेलकम हो जायेगा.

जब विरोध और जादा उबाल मारने लगे तो शहीदों के स्थल को ध्वस्त कर, और जादा बेहतर है की क्रोसिया वाली टोपी पहन कर, कर . कोई कुछ नहीं बोलेगा, थोड़ी बहुत भाग दौड़ और मामला साफ़, अबू आजमी और बुखारी  भी तेरे सहयोग में आ  जाएगा. 

चल बीति ताहि भुला के आगे की सुध ले. 

1 comment:

वन्दना said...

बिल्कुल सही सलाह दी है …………शानदार व्यंग्य्।
यहाँ भी देखें अभिव्यक्ति की आज़ादी बोल रही है
http://vandana-zindagi.blogspot.in/2012/09/blog-post_13.html