नारद: चिंता

Saturday, January 18, 2014

चिंता

बड़े बड़े  बुध्ध्जिवियो/ पत्रकारों / बड़े वालो / सेकुलरों/ आकश / पाताल/ बैताल, सभी से आग्रह है आप लोग कुछ करें, संघ से आप लोग दुखी है, संघ ने दुखी कर रखा है आपको, संघ बिल्ली है, चुपके सी आके आपके घर की दूध पि जाती है, और आप चाय से वंचित रह जाते है, संघ के लोग आपका बीडी छीन के पि जाते है, निश्चित ही ये दुःख की बात है, संघ के लोग आपके घर आके, खाना पीना भी भाभी/ माताजी जी से छीन छान  के खा जाते होंगे, निश्चित ही यह अक्षम्य पाप है.

चिड़िया जब आपके  सर पे बीट कर दे तो आप समझ ले यह पूर्व जन्म का संघी है और आपको पहचान गया है, इसलिए पको निशाना बनाया गया.  इस तरह की आपात स्थिति  से निपटने के लिए गुलेल हमेशा साथ रखे. निशाना गड़बड़ हो तो उसे गन्दी गन्दी गालिया सुना के गन्दी गन्दी गालिया देने वाला कहें, उसके कान फाड़ दे जिससे वो अपनी तरफ आने वाली प्लेन की आवाज नहीं सुन पायेगा और टकरा के मर जाएगा.

ये संघी किसी भी रूप में हो सकते है, पेड़ के रूप में, पौधे के रूप में, यदि किसी नीम से आप दातुन तोड़े और वो कड़वा हो तो समझ ले की नीम संघी है, तत्काल मुह धो के पेड़ को अपने मुख मुद्रा से अभिमंत्रित शुद्ध ५००१ गाली दे और तत्काल आरी चलवा दें.

चलते फिरते समय हमेशा ध्यान रखे की किसी संघी से न टकरा जाय, बस ट्रेन में चलत समय ख़ासा सावधान रहे, संघियों का प्रकोप यहाँ भी हो सकता है, मान लीजिये बस खराब हो जाए तो आप समझ ले की इसमें संघियों की साजिश है की आपने गंतव्य पे लेट पहुचें, या ये भी हो सकता है की अमुक गाडी किसी संघी के शो रूम की हो , नहीं तो कम से कम बेचने वाला सेल्स मनेजर जरुर संघी ही होगा, अन्यथा आपको इतना कष्ट देने की जोखिम क्यों उठाता जिससे  दुनिया दुखी है.

कुछ भी करते या लेते ससमय ध्यान रखे की उसमे संघी की साजिश न हो, मसलन पास के किराना स्टोर यदि किसी संघी का हो तो आपके पेट में अल्सर पड़ सकते है, या आपका पेट ख़राब हो सकता है, यदि एसा होता है तो आप तत्काल उसके घर के उलटे अपना मुह कर वायु शंका निवारण करें. संघी किसी भी रूप में हो सकते हैं, उनको पहचानने का सबसे सरल उपाय ये है की यदि कोई पशु पक्षी, मानव लोजिकल बात करे या आपके खिलाफ बात करे तो आप समझ लें की ये संघी हो सकता है. 

वैसे आप चाहे तो इस क्रिया से अपना व्यक्तिगत लाभ ले सकते हैं, मसलन जब चाय पीनी हो या दूध गरम करनी हो तो किसी संघ को आवाज लगा उसको छत पर बुला लें फिर उसे देख  चाय का पतीला अपने दिमाग या पीछे रख बिना गैस खर्च किये  गरम कर सकते हैं. ठण्ड के मौसम में अपमे गुसल खाने में किसी संघी की फोटो लगाए आपका शरीर जल रहा होगा, अतः पानी गर्म करने की जरुरत नहीं. ये सब उपाय मै इसलिए  बता रहा हूँ की सोते से खाते से, और बाकी सब भी करते समय आपके दिमाग से संघ का भुत वैसे भी नहीं उतर .
सच बात तो ये है आपका खाना, हसना रोना, या ये कह लें की भविष्य तक संघ और संघियों पे निर्भर है.
 तो बेहतर है कुछ ाव्यक्तिगत लाभ भी उठायें .

कृपया कुछ करें, आप जिस तरह से रुद्राक्ष की माला ले सुबह शाम संघी संघ कर वायु में उसका "कोसना" की मात्र बढ़ाते जाते हैं वह सेकुलरो, बुध्जिवियोंके लिए चिंता का विषय इसलिए है की उनका विष भरा नाम वायु में घुल इस जमात की जान ले सकता है अतः चिंता का विषय इसलिए इसलिए की आपके इस रुद्राक्ष युक्त मारक कोसने से से उनके स्वाथ्य पे कोई असर नहीं पड़ता, वो आपके तरफ देख मुस्करा देते आर आप फिर से जल भुन कर वायु  में कार्बन डाई आक्साईड की मात्रा बढ़ाते है जिससे ओजोन हर दिन अपना अंतिम दिन मानता है , इधर आप घुट रहे हो उधर आपके क्रियाकलाप से ओजोन. दोनों की चिंता समाप्त करने का उपाय खोंजे बजाय की अपना जी और ओजोन को डराने के.

एक "संघ निवारण संघ" बना के भी इनसे निपटा जा सकता है, इसके लिए मुलायम, माया, या नवजोत "आपा" का सहारा ले सकते है. कुछ काम और कियें जा सकतें है मसलन उनके पीछे कुत्ते छोड़ दें लेकिन उसका कोई फायदा नहीं वो दिन रात आप लोगो को तो देखते ही है, प्लेन चिट चलवा दें, अंडा कटवा दें, जिन्न छोड्वा दें, या बाबा बंगाली से के पास उन संघीयों की फोटो ले के चले जाए या सामूहिक आहुति यग्य करावा दें, कुछ न कुछ तो होगा ही.
पीपल के पेड़ में "सुबह का"  पानी  डालने से भी लाभ होगा, कर के जरुर देखें, यदि लाभ न हुआ तो समझ लें की संघियों की साजिश है.


आप जिस तरह से दिन ब दिन दुबले होते जा रहे हैं वो खासा चिंताजनक है, इससे आपका मानसिक संतुलन खराब हो सकता है, पेट दर्द, सिरद, निमोनिया इत्यादि आप पर हमला कर अपना नुक्सान करवा सकते है.  बिना संघियों को ठिकाने लगाये इस तरह से दिन रात हुक्के की तरह गुड्गुडाने से आपका कोई फायदा होता नहीं दिखता. कृपया कुछ करें. 

आपका एक संघी शुभचिंतक 

सादर 
कमल कुमार सिंह
१८ जन २०१४ 

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (19-01-2014) को तलाश एक कोने की...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1497 में "मयंक का कोना" पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रविकर said...

उम्दा पेशकश -
शुक्रिया महाशय -