नारद: कालिवूड: कोंग्रेसी धंधे का नया आयाम

Monday, April 16, 2012

कालिवूड: कोंग्रेसी धंधे का नया आयाम





आईये जाने पहले "कोंग्रेस"  शब्द की  उत्पत्ति   कहाँ से हुई ??   दो  हवशी   पुरुष और स्त्री के आपसी अवैध सम्बन्ध को कोंग्रेस कहते हैं झूठ   नहीं बोल रहा यहाँ देख लीजये "  Noun: congress  'kóng-grus [N. Amer], 'kóng,gres [Brit]
  1. The act of sexual procreation between a man and a woman; the man'spenis is inserted into the woman's vagina and excited until orgasm andejaculation occur
    sexual intercourseintercoursesex actcopulationcoituscoition,sexual congresssexual relationrelationcarnal knowledge . 
  2. अब इसके सत्यापन के लिए एक लिंक  दे रहा हूँ :-http://www.wordwebonline.com/search.pl?w=congress



कोंग्रेस ने घोटाला उद्योग  में जितनी तरक्की  की है उससे उनकी ख्याति देश ही नहीं वरन विदेशो तक जा पहुंची है. घोटाला उद्योग जिस आयाम तक कोंग्रेसियों ने पहुचाया है वहां तक ले जाना किसी और के बूते की बात नहीं. कोंग्रेस  में "प्रतिभाओं" की कमी कभी से नहीं रही है, इसकी नीव आल राउन्डर नेहरू जी ने अपने ज़माने में रख दी थी जिसको उनके पपौत्र राजीव गाँधी ने मजबूती दिया और अब घोटाला उद्योग उनकी एक मात्र (नेपथ्य का पता नहीं ) धर्म पत्नी सोनिया जी के नेतृत्व में  नयी उचाईयों को छू रहा है, खानदानी गुण  श्री राहुल जी में खूब दीखते हैं. 

इसी के साथ ही "कोंग्रेस काला  व्यापार  मंडल" अब वयस्क फिल्म उद्योग के क्षेत्र में अपने पाँव रख दिए है. 

और कोंग्रेसियो का पिछला रिकार्ड और छमताओं को  देखते हुए ये कहा जा सकता है की इस क्षेत्र में भी वो जल्द ही अपना  एकाधिकार   प्राप्त कर लेंगे. रोचक बात ये है की इसकी भी नीव नेहरू- और गाँधी वादियों के कामन डैडी गाँधी जी डाल गए थे, नेहरू जी अपने अदाकारी से कई  कमसिन    हसिनाओ के साथ व्यावसायिक   अदाकारी की, तो गाँधी जी सत्य के साथ प्रयोग  करने के साथ साथ  "सुंदरियों के साथ ब्रहमचर्य प्रयोग" जैसी कला फिल्मो को आगे बढाया. 

गाँधी - नेहरू के बाद ये कला छोड़ लोग घोटाले के धंधे में पाँव जमाने लग गए जिससे उनका ये व्यवसाय कमजोर पड़ गया . लेकिन  कुछ वर्ष पूर्व  तिवारी जी ने इस पुश्तैनी उद्योग को आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया और एक गुप्त कला फिल्म- "खुबसूरत गलती  किसकी"  बना  इस पार्टी  उद्योग को  पुनः  जीवित किया और जान फूंक कर मील का पत्थर गाड़ दिया.  इस फिल्म के फलस्वरूप उनके झोली में एक अवैध पुरस्कार भी आया. 

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान के सुपरस्टार मदेरणा ने एक और गुप्त कला फिल्म बना इस उद्योद जगत में हाहाकार मचा दिया जिसका लोहा हर जगह  माना गया. भाजपाईयों ने इनके फिल्म को खूब सराहा, कर्णाटक से गुजरात तक ये फिल्म सिल्वर जुबली हिट रही. आमिर खान की तरह कोंग्रेसी भी कम लेकिन उम्दा फिल्म बनाते हैं . 

अभी सुनने में आया है की मनु सिंघवी की एक फिल्म तैयार हो चुकी है- " न्याय  बिस्तर में" , फिल्म में एसा कुछ भी नहीं है जो पिछली फिल्मो में नहीं था और ये भी शायद एक उम्दा फिल्म है ,  फिर भी पता नहीं क्यों हाई कोर्ट ने इसपर बैन लगा दिया है . यह   फिल्म    मीडिया   सपोर्ट का अभाव भी झेल रही है , जबकि पूर्व में मदेरणा द्वारा निर्मित "भवरी की जवानी" देखने मात्र से  भाजपायियो को ढेरों  कीमत चुकानी पड़ी. अब देखते है ये सनसनी खेज फिल्म कब रिलीज होती है . 
क्या इसको भी देखने मात्र से मिडिया कवरेज मिलेगा ?? ये तो वक्त ही बताएगा, वैसे मेरी तरफ से इस फिल्म को ५ में  ४ अंक दिए जाते है ..