नारद: अन्ना की फ़ौज मे हिजड़ों की मौज

Saturday, July 28, 2012

अन्ना की फ़ौज मे हिजड़ों की मौज


मुसलमानों और संघियो को दूर कर अन्ना टीम एकदम अलग थलग पड़ गयी है.. खैर ये भी होना था.. अब नमक हरामी करोगे तो यही होगा, पहले आंदोलन मे जहाँ संघ का समर्थन था, तो आंदोलन हिट हुआ, लेकिन नमक हरामी की हद तब हो गयी जब अरविन्द ने कहा की संघ दूर हो जाओ,  खैर अन्ना टीम कुछ भी संघ को कह ले लेकिन फिर भी संघी अन्ना टीम की इज्जत करते हैं, एक बार मे ही बात माँन अपने आप को अलग कर लिया, नमूना तो मुंबई मे ही दिख गया था, और आज देल्ही मे इसका असर साफ़ देखा गया..आखिर अन्ना टीम देश हित मे काम कर रही है और संघियो ने उनकी बात मान उनका सहयोग किया है, देश हितों के लिए कार्य करने वालो की बात न मानी जाय ये बड़ी राहुल जैसी बात होगी .. 

पुराने ज़माने मे योगी जंगल मे, अकेले जाके चिंतन मनन करते  थे जिससे सिध्धि प्राप्त होती थी, और उसका उपयोग वो समाज और देश की भलाई मे करते थे... लेकिन आज ???? आज भीड़ जादा हो गयी तो चन्दा जादा, और कम हो गयी तो कोई बात नहीं अकेले हैं तो क्या, सिध्धि प्राप्त कर के रहेंगे.. लेकिन भाई उसके लिए जंगल या हिमालय  मे जाओ, जंतर मंतर पर नहीं. अन्ना का कहना है भीड़ मन की आँखों से देखो, जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी या इसके उलट देखता है..वाह !! क्या रंगीला अध्यात्म है... खैर आंदोलन मे श्रृंगार रस का मजा न हो तो कोई मजा है??? 
अन्ना कहते हैं भीड़ दिव्य दृष्टि से देखो जैसे  महाभारत का संजय देखता था, इस प्रकार के दिव्या दृष्टी से देखोगे तो सारा देश  हमारे साथ है, अरे अन्ना जी , ये संजय वाली दिव्या दृष्टी से देखोगे तो देश भर मे कुछ और ही नजर आएगा, कोई बाथरूम  मे नहा रहा होगा, कोई घूम रहा होगा,  और वही द्रस्टी जो अपने आस पास कोने मे लगा दी तो आपके ही टीम वाले गुठ्का, बीड़ी, सिगरेट का सेवन करते, आपको गलियां देते मिल जायेंगे, और जो इस प्रकार की दिव्य दृष्टि किसी नवविहाहित के कमरे मे डाली तो आपके अरमान जाग जायेंगे.

वैसे सच यदि इस प्रकार की कोई दिव्य दृष्टि आपके पास है तो एक दिव्य वीडियो कैमरे का भी इंतजाम कर लीजिए, क्योकि साधारण कैमरा सामान्य  आँखों से दिखाई देने वाला भीड़ कैद करती है न दिव्या दृष्टि वाला... फिर आप जहाँ भी किसी चोर नेता को अंड- संट करते देखे पटाक दिव्या कैमरे से कैद कर लें.. फिर वही मिडिया वालो को बेंच दे, बेचना खोचना आपसे न हो सके तो प्रशांत भूषण को लगा दे , वो कश्मीर का भी सौदा कर सकता है तो मिडिया से भी बिचौलियापन भी कर लेगा.. इससे आपको अछ्छे पैसे मिल जायेंगे, फिर न चंदा लेने की जरूरत पड़ेगी न ही चंदा के लिए आन्दोलन करने की... 

खैर अब आज की बात करते हैं, मै पंहुचा होऊंगा कोई ४ बजे के आस पास, हालाकि  मै संघी हूँ न कि उनका समर्थक, लेकिन मै शाजिया जी के स्माईल का फैन हूँ, बार बार उनकी एक झलक के लिए ही जाता हूँ, जैसे बचपन मे सुंदरता मे एश्वर्या जी मेरी आदर्श थी वैसे आज शाजिया जी मेरे लिए हैं... 

वहाँ सब मस्ती से बैठे थे, बैठने  की काफी अच्छी व्यवस्था थी क्योकि एक एक आदमी १० -१० फूट दूर बैठा था शायद भीड़ कम थी सो सबने जगह का आनंद उठाया, सभी को बिस्कुट बांटे जा रहे थे, एक तो  बिस्कुट के लिए लड़ पड़ा (कृपया चित्र देंखे) सब मस्त झूम रहे थे, एक नौटंकी वाला नौटंकी दिखा रहा था बीच बीच मे रावन की तरह अट्टहास भी कर रहा था, थोड़े देर बाद वो भी बिस्कुट पानी के लिए लडने लगा (कृपया चित्र देंखें ). कुमार विश्वाश दूसरों से चुराई गयी कविता का पाठ कर रहे थे (उनमे से अधिकतर  डा सौरभ या मदन जी की थी) कोई अपने बगल वाली लडकी ताड़ रहा था.  खैर जो भी हो माहौल एक दम बढ़िया था. 

लेकिन मुझे इससे क्या लेना देना, मै तो बस शाजिया जी की एक स्माईल के लिए गया था. लेकिन ये क्या ???????? ये तो कोई किन्नर थी जो मंच से भाषण दे रही थी , मै गश खा गया .. अन्ना पे बड़ा क्रोध आया , क्यों शाजिया जैसी सुन्दर युवती से छेड़ छाड कर अपनी दिव्य शक्तियों से  उसको बीच का बना दिया, मेरा दुखी चेहरा देख एक ने कहा अरे ये शाजिया नहीं किन्नर नरेश सोनम है , तब जा के मेरी जान मे जान आयी .
लेकिन जान के साथ एक सोच भी, की क्या अन्ना टीम इस हद तक निराश हो गयी हो की ताली पिटने के लिए भीड़ कम पडने लगी तो प्रोफेशनल ताली पिटार ले आया... खैर प्रोफेशनलिज्म का जामाना है, आजकल हर काम प्रोफेशनली होना चाहिए, शायद यही पे अन्ना की दिव्य शक्तिया खत्म हो गयी नहीं तो उन्ही दिव्य शक्तियों के सहारे ताली भी बजवा लेते..  तभी मुझे दिव्य स्माईल लिए हुए दिव्य शाजिया जी दिखी और मेरा मनोरथ पूरा हो गया.. सो रवानगी ... 

बाकी खबर कल, अब कुछ तस्वीरे देख लें, जो की मेरी मोबाईल से हैं, कार्यालय से सीधे अन्ना दिव्य स्थल पर गया था कैमरा न ले सका.. 
                                                भीड़ कम , सो दिव्य दृष्टि से बड़ा लो
                                                  बिस्कुट मैन (कई बार लड़ाई करवाई इसने )
                                            रावण जी, बड़ी लड़ाई के बाद बिस्कुट पानी मिला इनको

किन्नर नरेश सोनम जी (ताली पीटो प्रभाग)

2 comments:

प्रवीण गुप्ता said...

विनीत जी टीम अन्ना को अपनी ओकात पता चल गयी हैं, दो, तीन मुल्लो को बिठाकर, मुसलमानी टोपी ओढ़ कर इन्होने ढोंग किया था. संघ को गाली देकर के ये लोग अपने आप को धर्मनिरपेक्ष बता रहे हैं. अब बुलाओ भीड़. जय श्रीराम, वन्देमातरम..

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत ख़ूब!
आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 30-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-956 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ