नारद: "माँ की आँख"- के आँसू

Friday, February 10, 2012

"माँ की आँख"- के आँसू

माँ एक पवित्र शब्द है ऐसा शब्द जिसके आगे भगवान भी झुकता है , लेकिन अपने देश की एक पार्टी ने भी विदेश से आयातित एक इम्पोर्टेड मम्मी नियुक्त किया है, जिसके नमकीन आँसू में में आप व्हिश्की मिला के पी लें तो चखने को कोई जरुरत नहीं हाँ आवश्यकतानुसार बर्फ जरुर मिला सकते हैं. 

इस मम्मी को भगवान ने सब कुछ दिया, लेकिन सोलहो आना ठीक ठाक पुत्र न दे पाए, एक अमिताभ वाले "पा "फिल्म के चरित्र जैसा है, बड़ा तो हो गया लेकिन बेबी का तमगा लगा हुआ है, एक पागल, एक चोर और भी  ढेर सारे व्याधियों से युक्त, एक बेटी और दामाद भी मिला तो वो भी इतना स्वार्थी की अपने बच्चो को भी अपने साथ राजनीति के काम पर लगा दिया, ये जानते हुए की चौदह साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना अपराध है .  शायद फैक्ट्री में ही कमी रही होगी या कच्चा माल में, सो इनके  बेटे भी अजीबो गरीब हैं, हलाकि इनकी संख्या भी रावन के पुत्रों के बराबर ही है फिर भी मेघनाद और अक्षय कुमार टाइप में बस कुछ लोग ही कुख्यात हो पाए. 

एक तो अपने है लुंगी वाले, सिद्धांतों के मसीहा, बीवी का हरम हो या संसद,  सिध्द्धांत  वश लुंगी नहीं छोडते या क्या पता  लुंगी में घोटाले छुपा के रखे हैं जो पैंट की जेब में नहीं आ पाता शायद. 
खैर ये उनकी अपनी व्यक्तिगत समस्या है अपन से क्या ?? 

एक और  लाडले सुपुत्र है जिनको एम्. पी . वालो ने लात मार के भगा दिया,और तब से वो विप्क्षित से रहने लगे हैं, और कहा जाता है न की कमजोर पुत्र से माता को जादा लगाव होता है , सो मम्मी जी को इस दिमागी विकलांग से भी खासा लगाव है. 

एक हैं अपने कानून बनाने वाले मंत्रालय के लाडले, कहा जाता है न संगत से गुण होत है और संगत से गुण जात , या आप " खरबूजे को देख खरबूजा रंग पकड़ता है " मुहावरा भी सेट कर सकते हैं. सो विकलांगो के टोली के साथ रहने से कुछ प्रभाव इन पर भी आ गया है. 

और सारी बाते चुनावी ज्वार के ज्वर में इस तरह से आ रही हैं जैसे देखने वालो के सामने लड़की का अवगुणों को छिपा, के उसे  बढ़ा चढा के अच्छा बताया जाता है.  

हालिया बयान में इन्होने कह दिया "आतंकवादी  जब मारे गए थे तो माता जी बहुत रोयीं थी."  

पता नहीं ये सच कह रहे थे या झूठ, या सिर्फ मुसलमानों की सहानुभूति हेतु, लेकिन इस पागल को क्या पता की मुसलमान भी उन्हें आतंकवादी ही मानता है सिवाए इन चुनाव वाले विकलांगो को छोड़ और अब समझ में आया की ओसामा के मारे जाने पर पार्टी ने क्षोभ क्यों जताया था. 

आज तक किसी का बयान नहीं आया की पार्टी ददिया सास, पार्टी के पापा और पार्टी के देवर के मरने पर पार्टी की मम्मी की आँखों में आँसू आये,जो माता इतने कठिन परिस्थितयों में भी हिम्मत से काम लिया,  जिसका ह्रदय विचलित नहीं हुआ वो अपने बच्चो के लिए रो पड़ी. आशा है आने वाले भविष्य में भी ये माता अपने बच्चों ,अफजल गुरु पे यूँ ही स्नेह बनाये रखेंगी, साधुवाद ! 

हाय रे मातृत्व - हाय रे "माँ की आँख "!!!!! तुम्हे कोटि कोटि प्रणाम. 

कमल , 
१० /फरवरी / २०१२ 

5 comments:

जाटदेवता संदीप पवाँर said...

कोड में खाज, ऐसी बूढी माँ, भगवान अगर कहीं है तो ऐसी किसी को ना दे।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सच में दुखद ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर की जाएगी!
सूचनार्थ!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

चले चलो... बढे चलो...
आंसू बन ढले चलो...

बढ़िया है...

anju(anu) choudhary said...

अब क्या कहें.....माँ तो माँ हैं ..