नारद: जनमत संग्रह और पप्पू कि पिटाई :

Thursday, October 13, 2011

जनमत संग्रह और पप्पू कि पिटाई :

नारायण नारायण , प्रभु आज आप चिंतित क्यों दिख रहे हैं ??कोई विशेष कारण ??

विष्णु : नहीं नारद बस पुराने जख्म याद गए , जब मैंने  लक्ष्मी को पाने के लिए  कछुए का भेस  बनाया , और मंदार जैसे पर्वत को धारण किया , हलाकि सख्त होने कि वजह से कुछ हुआ नहीं , लेकिन निशाँन  तो पथ्तर पे भी पड़ जाते हैं , इसलिए एक तरफ  हो के लेटा रहता हूँ बांह  के बल . , इतने के बाद भी असुरों से लड़ाई लेनी पड़ी , यादे तो यादें है , आ ही जाती हैं , दिल को रुला जाती हैं !

प्रभु सुना है जब दूसरे का दुःख जादा देखने को मिल जाये तो अपना कम लगने लगता है , आईये आपको आज पृथ्वी दर्शन कराता हूँ , कौन जाने दुःख कम हो आपका  ......

और नारद जी ने समुन्दर में एक थाप दी : चित्र उभरा   : इंडिया टी वी : 
आज तीनो युवको को कस्टडी में , जिन्होंने कल  पप्पू  कि पिटाई कि थी , 

पांच मिनट बाद , "   पप्पू के समर्थकों पे पड़े लात जूते "

प्रतिक्रिया  :- 
  खान्ग्रेस     " पप्पू से सहमत नहीं , लेकिन पिटाई उचित नहीं ( अंतर्मन - बहुत सही हुआ बड़ा अन्ना अन्ना करता था ) 
खाजपा : मंदमोहनावस्था (कोई प्रतिक्रिया नहीं ) 
टीवी : निंदनीय , 
प्रेस : निंदनीय : 
जनता : गयी तेल लेने , जनमत में जनता का  का कोई मत नहीं लेता . 
ब्लॉगर : मिलीजुली प्रतिक्रिया : 

तभी शेषनाग ने जम्हाई ली और कनेक्शन टूट गया .. 

" क्यों प्रभु कुछ राहत मिला " ????
विष्णु : ये गलत है , किसी के अपने विचार हैं कुछ बोले , इसका ये मतलब नहीं कि आप लात घूसों से पिटाई करोगे , ये कोई तरीका है भला .. 

क्यों प्रभु ??? जवालामुखी फूटे तो गलत , और अंदर ही अंदर उबले तो ठीक  तो सही ??? जवाला फूटना  तो आपके ही प्रकृति का नियम है न , 

प्रभु , पप्पू बोलता है कि कश्मीर में जनमत संग्रह करा लो यदि वो भारत के संग आना चाहे तो ठीक नहीं तो पाकिस्तान को दे दो , .. यदि शुक्राचार्य कहे कि  देव और असुरों में जनमत कराओ और असुरों के पक्ष में गया तो क्या आप स्वर्ग असुरों को दे देंगे ???? 

विष्णु : अरे विचार तो विचार हैं , कोई करने थोड़े जा रहा था वैसा ??? 

प्रभु असुरों का बस चले तो कब का आपको समुन्द्र में फेक के स्वर्ग हड़प ले , वो तो भला हो देवताओं का जो पिट के या पीट के हर बार बचा लेते हैं , यानि आप तब तक इन्जार करंगे कि वो सक्षम हो के देने के  लायक हो  तब विरोध करेंगे ???
आप ही कहते हैं न कथनी करनी में कोई फर्क नहीं होना चाहिए , विचार को क्रियान्वयन करना धर्म है , तब बच्चों ने विचार को व्यवहारिक रूप दे दिया तो तकलीफ क्या , इससे पहले कि कही पप्पू पास हो के कश्मीर देने का जनमत संग्रह तैयार  कर लेता  तो ??  दूसरी बात भारतीय संविधान के अनुसार कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है तो उसपे कैसा जनमत , तो क्या पप्पू के विचार  देशद्रोही वाले नहीं ??? यदि उसमे छमता होती तो कौन जाने करवा देता , लडको में विचार को रूप देने कि छमता थी सो कर दिया . 
नहीं तो विचारों का क्या है कुछ भी बोलते रहो , कल को किसी नेता को अपने विचार से गाली  दे दो  तो मुक़दमा , ओमपुरी का हाल अपने नहीं देखा ??? तो इसपर मुक़दमा क्यों नहीं ???? क्या बुरा किया लडको ने ?? 

पप्पू अहिंसावादी के साथ रहता है , इसको पता होना चाहिए कि देश के लिए तो अहिंसावादियों तक का खून  उबल जाता है और चाहिए भी , भारत पाकिस्तान कि लड़ाई  भी याद करिये जब एक गाँधी के पुजारी और महान अहिंसावादी ने सरहद पे फ़ौज भेज दी थी , तो क्या गलत किया ???? उसको लाठी ले के सीमा पे अनशन पे बैठना था तब भी , ...... ?????

इसीलिए कहता हूँ प्रभु सुबह शाम माया के नवनिर्मित  उद्यान का भ्रमण किया करो दिमाग ताजा रहेगा , कुतर्क न आयेगा ... सुना है बड़े निर्जीव हाथी है वहाँ उसी के जैसे , ऊपर से हाथी ने हाथी पे भी कमीशन खा लिया ... 

विष्णु : बात तो तुम्हारी सही है , नारद , अहिंसा का हमेशा पालन भी ठीक नहीं होता , नहीं तो भस्मासुर मुझे कब का भस्म कर चूका होता , और मेरा अवतार बाली वध भी नहीं कर पता , और न सीता वापिस आती , ......अब जा के मुझे कुछ आराम मिला , तुम्हारा उपाय तो लाजवाब है , 

हा हा , धन्यवाद प्रभु , आगे कौन जाने दिग्गी और बाकियों पे भी ठपली पड़े , और आपका दुःख और कम हो ... नारायण नारायण !!!

3 comments:

रविकर said...

बहुत खूब ||
बधाई ||

http://dcgpthravikar.blogspot.com/2011/10/blog-post_13.html

वाणी पुन्नू की प्रबल, अन्नू का उपवास |
चित्तू का डंडा सबल, दिग्गू का उपहास |

लोकपाल मुद्दा बड़ा, जनता तेरे साथ |
काश्मीर का मामला, जला रहा क्यूँ हाथ ?

कालेधन से है बड़ा, माता का सम्मान |
वैसी भाषा बोल मत, जैसी पाकिस्तान ||

झन्नाया था गाल जब, तू तेरा स्टाफ |
उस बन्दे को कूटते, हमें दिखे थे साफ़ ||

सड़को पर जब आ गया, सेना का सैलाब |
तेरे बन्दे पिट गए, कल से थे बेताब |

करना यह दावा नहीं, हो गांधी के भक्त |
बड़ी दलीलें तुम रखो, उधर है डंडा फ़क्त ||

वैसे दूजे पक्ष को, मत कर नजरन्दाज |
त्रस्त बड़ी सरकार थी, मस्त हो रही आज ||

पहले पीटा फिर पिटा, चले कैमरे ठीक |
होती शूटिंग सड़क पे, नियत लगे ना नीक ||

नारद said...

हा हा हा हा , सटीक पंक्तिया, सटीक व्यख्या आपकी निराली ,
पीटा पप्पू , पिटेगा दिग्गी यदि बात जनता कि न मानी ,
बात जनता कि न मानी क्योकि ये अज्ञानी ,

फिर पिटे जनता यदि इनको पटरी पर है लानी !

नारद said...

आप सभी को बहुत बहुत आभार , हौसला अफजाई के लिए , :)
त्रुटियाँ इंगित करने के लिए मुझे मेल करे :-

kkumarsinghkamal@gmail.com

ताकि आगे और सुन्दर प्रस्तुति दे सकू :)

सादर
कमल कुमार सिंह