नारद: जलन

Friday, December 16, 2011

जलन

"जलन", बहुत अपार महिमा है इसकी, कुछ स्वप्रबुद्धों ने इसकी निंदा की है, लेकिन अब मै उनसे जलता हूँ, क्यों निंदा की  इतने महान शब्द कि ???

जिसने भी इस शब्द का आविष्कार किया होगा वो निश्चय ही महान ज्वलनशील  होगा, कितना तपा होगा, ढेर सारे अनुभव होंगे उसके पास, और इतने मेहनत से किये गए आविष्कार को कालान्तर में निंदा दृष्टि से देखा जाए, कहाँ तक उचित है ?????

"जलन " का इतिहास भी  हिंदू धर्म  की  तरह आदि और अन्नत है, न इसका कोई ओर है, न इसका कोई छोर है, पुरानो के ज़माने से इसका जिक्र है, इन्द्र ने जलभुन के हनुमान पे वज्र चलाया था, और इन्द्र से जल भून के पवन देव ने ब्रम्हांड व्याकुल कर दिया. इससे एक और अर्थ निकलता है, आज का कारपोरेट कल्चर भी इसी जलन के आशीर्वाद से चल रहा है, पवन और इन्द्र कि तरह यहाँ भी पद वृक्ष होता है.

कभी कभी एक होना भी जलन का कारन होता है, तभी तो सूर्य कि प्रक्रिया में संलयन होने से, जलन कूट कूट के बाहर आता है और उसका मजा पूरा विश्व लेता है.

अजी जरा दिमाग तो लड़ाए, जलन ने हमे और हमारे इतिहास को कितना कुछ दिया है, न जाने कितने आदर्शो को दिया है.  यदि सुपर्णखा राम के प्यार में न जलती, तो लक्षमन उसके नाक कान क्यों काटते ??? यही नहीं काटते तो राम रावन से जल के सीता को क्यों किडनैप करता ?? नहीं करता राम रावन से जल के उसको मारते कैसे ?? और नहीं मारते तो क्या हम आज राम को आदर्श पुरुष कहते ???? वाल्मीकि डाकू के डाकू ही बने रहते, और तुलसी रामचरीत की  रचना कभी न कर पाते, और न ही हमें महान कालजयी रचनाये मिल पाती.

यदि भारत की अपार सम्पदा  से जल के मुगलों ने आक्रमण न किया होता तो भारत में एक और धर्म इस्लाम कैसे आता ??? न हम शराबी बाबर के बाबरी मस्जिद के लिए लड़ते, न ही कुकर्मी अकबर को महान बोल सकते, और हमारा इतिहास अधूरा रहता,  और न ही हमारा भारत महान धर्म निरपेक्ष होके धरम के आधार पे आठ प्रतिशत का आरक्षण देता...

मुहमद से जल के यदि पब्लिक पत्थर न मारती तो तो क्या तो कुरआन कैसे बनता ??और हम अपने बच्चों को क्या बताते कि राम कौन थे ?? रावन कि चिड़िया का नाम है?? मुहम्मद कौन , इसा कौन ??? कितनो को पी एच डी के लिए विषय भी न मिलता.  आज लोग इन्ही महा पुरुषों के नाम से एक दूसरे से जलते हैं, वर्चुअल बहस करते हैं, इसमें भी फायदा है, टाईपिंग गति बदती है, लोगो में दुर्भावना जगती है, नये नए तकनिकी  गालियों का आविष्कार होता है, जिससे दिल को तसल्ली मिलती है.

भाई जलन न होता तो बीवी आपको ले के  किसी दूसरे लडकी से क्यों जलती ?? इसी चक्कर में रोज नए नए पकवान कैसे खाते ??? और बीवी यदि पडोसी की  कार देख न जले तो आपको नयी कार की  प्रेरणा कहाँ से मिलती ??? विस्वाश मानिए जिंदगी भर लूना से चलेंगे.

पाकिस्तान यदि भारत से न जले तो आतंकी आक्रमण कैसे हो ? राजनीति कैसे होती ? कसाब   भारत के "अथिति देवो भव " कि संकल्पना का ज्ञान कैसे पाते ????
खूब है भाई आप लोग, खामख्वाह जलन को बदनाम कर रखा है,

जलन से ही प्रशांत भूषण  पिट गए और भारत बदलने को  भगत क्रान्ति सेना का भी निर्माण हुआ, अब कहिये ये क्या कम है ??

जलन न होता तो विश्वास मानीये हम कही के न होते,

जलन ढेर सारी वांछित वस्तुए भी दिला सकता है जैसे राजनीति करना हो किसी नेता से जल भून के जूते फेंक दें  फिर देखिए चौबीस घंटे आने वाले चैनल आपके  इस फ़ालतू काम को भी कैसे चमकाती है, बाबा को गाली दो देखो तुरन्त कोंग्रेस से प्रस्ताव आ जायेगा, निरपेक्षता के नाम पे हिन्दुओ को गाली दो , और त्वरित अपने प्रेस वाले  एक शानदार भूमिका के साथ कैसे आपको महिमा मंडित करते हैं, लेकिन अब सवाल ये है कि आप जूते क्यों मारो ????तो उसका प्रथम चरण है किसी के लिए अपने मन में जलन कि भावना लाओ तब जा के दिमाग और दिल हाथ का साथ देगा और कर दो लत्तम जुत्तम . जलन वह उत्प्रेरक है जो किसी भी इंसान को प्रेरित करता किसी खास और प्रसिध्ध कार्य के लिए. 

मेरी बात मानीये, जरा जल के तो देखिये , किसी के प्यार में ही सही, तो उसका मजा भी अलग है, छः छः महीने तक चक्कर काटना पड़ सकता है माशुका के लिए, इससे  धैर्य भावना का विकास होता है, पीछे पीछे भागने से स्वास्थ्य सही रहता है और मान लीजिए फिर आप से जल के माशुका कि भाई आपकी पिटाई कर दे तो इससे आप युध्द कौशल भी सीख जाते है जो आजकल अत्यंत दुर्लभ है, और कही दो बार से जादा पिट गए तो आप अपना पूर्णतः बचाव करने में सक्षम हो जाते हैं अपने भारतीय सेना कि तरह, जो कभी  अपने साले रूपी दुश्मनों  आक्रमण नहीं करती करती.

आप ही बताईये जलन का साथ छोड़ दे तो क्या प्यार करे ?? प्यार में बड़े बड़े खतरे हैं, प्यार करने वाला लड़का पिट जाता है, देश से प्यार करने वाले बाबा पिट जाते हैं, पडोसी से प्यार करने वाला पति पिट जाता है, भ्रस्टाचार से प्यार करने वाले कोंग्रेसी शरद पिट जातेआप ही बताईये जलन का साथ छोड़ दे तो क्या प्यार करे ?? 
तो आईये हम सब एक दूसरे कि जलन भावना का ख्याल रखते हुए इस परम्परा को और मजबूत किया जाए, हमारे देश के हित में, समाज के हित में .

कमल १६ दिसम्बर 

10 comments:

amit yadav said...

lajvab....! aapki kalpna sakti aur rchnatmakta bejod hai bde hi chutile andaj me aapne ek gudhya rahasya ka pardafas kiya hai ....aapko bahut bahut sadhuvad!

amit yadav said...

lajvab....! aapki kalpna sakti aur rchnatmakta bejod hai bde hi chutile andaj me aapne ek gudhya rahasya ka pardafas kiya hai ....aapko bahut bahut sadhuvad!

amit yadav said...

lajvab....! aapki kalpna sakti aur rchnatmakta bejod hai bde hi chutile andaj me aapne ek gudhya rahasya ka pardafas kiya hai ....aapko bahut bahut sadhuvad!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया आलेख!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया आलेख!

anju(anu) choudhary said...

वाह बहुत खूब....क्या व्याख्या की है आपने ''जलन'' की .....मज़ा आ गया ...सटीक व्यंग की प्रस्तुति है

Arunesh c dave said...

वाह वाह आज आपने ज्ञान करा दिया कि बाबावादी अन्ना को क्यो कोसते है :) :) :) जलन जलन जलन :) :) :)

Sanjay Mahapatra said...

जलो मगर पिछवाड़े से नहीं शीर्ष से तभी रोशनी होगी अन्यथा धुँआ ही उठेगा और रह जायेगी राख :):)

संजय भास्कर said...

बढ़िया आलेख!

नवीन करगेती said...

"कभी कभी एक होना भी जलन का कारन होता है, तभी तो सूर्य कि प्रक्रिया में संलयन होने से, जलन कूट कूट के बाहर आता है और उसका मजा पूरा विश्व लेता है."

"आप ही बताईये जलन का साथ छोड़ दे तो क्या प्यार करे ?? प्यार में बड़े बड़े खतरे हैं, प्यार करने वाला लड़का पिट जाता है, देश से प्यार करने वाले बाबा पिट जाते हैं, पडोसी से प्यार करने वाला पति पिट जाता है, भ्रस्टाचार से प्यार करने वाले कोंग्रेसी शरद पिट जातेआप ही बताईये जलन का साथ छोड़ दे तो क्या प्यार करे ??"


बहुत हि बढ़िया व्याख्या की हैं आपने "जलन" की...
मुझे तो अब आपसे जलन होने लगी है..... :-)