नारद: अनशन टूरिज्म

Monday, March 26, 2012

अनशन टूरिज्म

जब आप काम के बोझ से दबा हुआ  महसूस करते है तो लगाता है अब कुछ बदलाव  हो जाए जिंदगी में हर इंसान को आज कुछ नया चाहिए अपनी थकान उतारने  और अपने आपको तरो ताजा करने के लिए. उनमे से पर्यटन सबसे बेहतरीन विकल्प  है. 

आज कल तो ट्रेंड हो गया है, लोग सप्ताहांत  पे  बाहर निकल कर बहार खोजते है अपनी न हो तो दुसरे की. 

यूँ तो पर्यटन के कई आयाम है जैसे , ट्रेकिंग टूरिज्म , एडवेंचर टूरिज्म , इको टूरिज्म, कल्चरल टूरिज्म इत्यादि, लेकिन इनमे सबसे नया एक और आयाम विकसित हुआ जिससे लोगो को भरपूर मनोरंजन के साथ साथ कम खर्च में रोजगार के अवसर भी दे रहा है -"अनशन टूरिज्म" और इस नए आयाम के  संस्थापक है श्री अन्ना हजारे जी जो कभी देल्ही कभी मुंबई और अपने टीम द्वारा जगह जगह पे अनशन करवा के पर्यटन उद्योग में एक महान योग दान दे रहें हैं. 

अनशन टूरिज्म के फायदे:- 
१. अधिकतर इसका आयोजन सप्ताहांत में कराया जाता है तो ये आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प होता हैं कि आप बिना कार्यालय से छुट्टी लिए इसका लुफ्त उठा सके. 

२. ये हमेशा किसी एसी जगह होता है जहाँ आस पास  और कई एतिहासिक महत्त्व कि चीजों हो या किसी नामी चर्चित मेट्रो शहर में जहाँ  मिडियात्मक चींजे भरपूर हो, जिससे मनोरंजन का मजा दुगुना हो जाता है. 

३. इस दौरान आयोजन  करता, बैंड पार्टी, नौटंकी , फिल्म स्टार , कवि आदि को भी बुलाते है जिससे सभी प्रकार का मनोरंजन मुफ्त में हो जाता है बिना एक कौडि खर्च किये, अन्यथा वैसे यदि आप इन कलाकरों के कंसर्ट में जाए तो हजार से दो हजार कि टिकट ही होती है . 

४. इस प्रकार के  आयोजन में नए रोजगार का निर्माण होता है जिसमे  कल्लात्मक्ता और रचना शील रोजगार का निर्माण होता है, जैसे कोई चहरे पे रंग पोतने का काम करता है, कोई टोपी बेचता है, और तो और थोक  के भाव में झंडे इतने बिक जाते है जितने १५ अगस्त और २६ जनवरी को नहीं बिकते जिससे  पर्यटन के साथ थोड़ी सी देश भावना का भी विकास हो जाता है दिखावटी तौर पे . 

५ . इस प्रकार के आयोजन प्यार मोहब्बत और  प्रेम चारे को बढ़ाने में भी सहायक है, आम तौर पर ऐसे जब गर्ल फ्रेंड किसी नयी जगह या कोई फिल्म या कंसर्ट में ले जाने कि जिद करती है तो आप  कन्फ्यूज  हो जाते हैं कि कहाँ ले जाए, जो हाथ आप उसके कहीं और लगाने की सोचते है वो सीधे आपके जेब पर चला जाता है, तो जी हाँ, अनशन टूरिज्म में ले जाईये, सारी चीजें एक साथ एक प्लेटफोर्म पे आपका इन्तजार कर रही है. 

६ . इस प्रकार के आयोजन में शामिल होने से मनोरंजन के साथ आत्मविश्वाश और भाषा शैली का भी विकास होता है, जिन नेतावो से आप डर के मारे बात नहीं कर सकते उन्हें सरे आम जम के कोस सकते हैं गालियाँ दे  सकते है जिससे  निश्चय ही व्यकतित्व में निखार आता है और आपका आत्म विश्वाश बढ़ जाता है.  

क्या करे क्या न करे :- 

जो लोग अबकी इस प्रकार के नए पर्यटन पे जा के अपना टेस्ट बदलने कि सोच रहे हैं उनके लिए कुछ मुख्य बिंदु एवम टिप्स :- 

१. जिस भी आयोजन में जाए जिसका खाए उसका गायें नहीं तो आयोजन कर्ता आपको आयोजन स्थल से भगा सकते है, या नौबत मार पीट तक भी पहुच सकती है . 

२. ये प्रकार का वोलुएंट्री पर्यटन है तो कुछ न कुछ योगदान दें हलाकि विदेश से कई संस्थाए इस प्रकार के पर्यटन को बढ़ावा दे रही है फिर भी आपसे अपेक्षित है. 

३. अनशन टूरिज्म , "रिस्पोंसिबिल टूरिज्म" से काफी मिलता जुलता है अतः अपेक्षित है कि वहाँ के लोकल लोगो कि टोपी -पापड़ का मजा उठाये जिससे स्थानीय  लोगो का भला हो.  

४. कैमरा, मोबाईल आई पोड जरुर साथ ले जाएँ, अनशन पर्यटन स्थल पे यदि आपका मनपसंद कार्यक्रम नहीं चल रहा  हो  तो अपने निजी संगीत का लाभ उठाये. वैसे कार्यक्रम के बीच बीच में स्क्रीन पे गाना बजाना बजता रहता है यदि लाईव गाना बजाना बंद हो तो.

करियर :- 

नया क्षेत्र होने कि वजह से इसमें संभावनाएं काफी जादा है, ट्रेनिंग समय में आपको अपनी  जेब से  देना पड़ सकता है लेकिन बाद में मजे ही मजे है, पैसा, रुतबा, शोहरत सब आपकी कदमो में, इस क्षेत्र में काम करना  सम्मानीय हो सकता है, ट्रेनिंग के बाद आप अनशन सीनियर एक्सिक्यूटिव के तौर पर नियुक्ति मिलती है जो अनुभव और लगन पर आपको इवेंट मनेजर के  पद  तक  ले जा सकती है. और यदि अनुभव परिपक्व हो जाए तब अपना काम भी शुरू किया जा सकता है. 

इस क्षेत्र में भविष्य तलाशने वालो के लिए  ऐसे तो कोई औपचारिक संस्थान नहीं है लेकिन फिर भी नीचे लिखे कुछ संस्थानों से संपर्क किया जा सकता है :- 

१. अन्ना इंस्टिट्यूट ऑफ अनशन मनेजमेंट. वेस्ट चैप्टर 
पता : रालेगन सिध्धि , 
संपर्क : ग्राम प्रधान . 

२.अन्ना इंस्टिट्यूट ऑफ अनशन मनेजमेंट. नोर्थ  चैप्टर 
पता : गाजिय बाद
संपर्क : कुमार विश्वाश/अरविन्द केजरीवाल

इसके अलावा भी "ए आई अ  म" के छोटे मोटे फ्रेंचाईजी बड़े-छोटे  शहरो में मिल जायेंगे जहाँ, आपको इस नए आयाम कि पूरी बारिकिया सिखाई जायेंगी, आप चाहे तो किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञता हासली कर सकते हैं, जैसे :-
"मीडिया मैनेज मेंट :- इसमें आपको ये सिखाया जाता है कि मिडिया कैसे आपको तवज्जो दे भला मुद्दा  गदहों कि लड़ाई का हो. और प्रोडक्ट मार्केटिंग स्वतः ही हो जाया करेगी.

"क्राउड मैनेजमेंट" :- जादा जादा पर्यटक कैसे जुटाए .

"पब्लिक इमोशनल मैनेजमेंट" :- इसमें आपको सारे मुद्दे बताये जायेंगे जिससे आप अनशन टूरिस्म को एक नए आयाम तक ले जाते है.

"सस्टेनिबिलिटी" :- अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए आपके फिल्ड में जो आये या जो पहले से रहे उसको पीछे नहीं करेंगे तब तक आपके  व्यवसाय में ठराव नहीं आयेगा, तो आप दूसरों का इस्तमाल अपने लिए कैसे करे या खुद नमस्कार करके अपने स्टाफ से दूसरों का माल खराब कैसे बताये पूरी विशेषज्ञता दी जाती है.

 जो युवा जुझारू, मेहनती (दूसरों कि मेहनत को भी छिनने में माहिर ) चापलूसी इत्यादि गुणों में आगे हों और जो कुछ अलग हट के करना चाहते है जिसमे नून न फिटकरी और रंग चोखा तो  आप ये कोर्स कर के अपना उज्जवल भविष्य बना सकते है.

आईये इस नए आयाम से सम्बंधित कुछ ताजा  चित्र देखें :-
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                                                      रंगाई कि दूकान
                                         
                                                   अनशन टूरिस्म का मजा लेते जोड़े
                                                           अनशन टूरिज्म का मजा लेते जोड़े
                                                कोने में जोड़ा अपने गर्लफ्रेंड के साथ "जन्लोक्पाल " के समर्थन में
                                              रोजगार के अवसर
                                              रोजगार के अवसर , हाँथ के आभूषण
                                                     ब्रांडिंग
                                                       रोजगार
                                                    वार्तालाप
                                              खाए पिए बिना काहे का टूरिज्म ??
                                                  बगलवाले दूसरे आयोजन , प्रबंधन के अभाव में .


                                             अंत में मै , इतना तो बनता है ...


सादर

कमल
२७/१२/२०१२ 

7 comments:

रविकर said...

जी
सत्य का प्रगटीकरण

जाटदेवता संदीप पवाँर said...

इसी बहाने कुछ हो जाता है।

indianrj said...

आपने व्यंग्यात्मक रूप से जो लिखा वो निश्चित ही रोचक बन पड़ा है. लेकिन आज जो हम इतने लम्बे समय से अर्ध्चेत्नावस्था (निश्चित नहीं, अर्धजीवित है या अर्धमृत) में रह रहे हैं, अपने आसपास जो हो रहा है उसे एक मूक दर्शक बनकर और उसे ही अपनी नियति मानकर, मेरे ख्याल से ये 'अनशन tourism' से हमें ये उम्मीद तो दिला ही दी है की सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ और हम हर बात को झेलने के लिए विवश हैं, ऐसा भी नहीं है.

indianrj said...

आपने व्यंग्यात्मक रूप से जो लिखा वो निश्चित ही रोचक बन पड़ा है. लेकिन आज जो हम इतने लम्बे समय से अर्ध्चेत्नावस्था (निश्चित नहीं, अर्धजीवित है या अर्धमृत) में रह रहे हैं, अपने आसपास जो हो रहा है उसे एक मूक दर्शक बनकर और उसे ही अपनी नियति मानकर, मेरे ख्याल से ये 'अनशन tourism' से हमें ये उम्मीद तो दिला ही दी है की सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ और हम हर बात को झेलने के लिए विवश हैं, ऐसा भी नहीं है.

वरुण कुमार सखाजी said...

फोटो जितना बोल रहे हैं, उतना लेखन नहीं बोल सका। बहुत अच्छा कमल भाई।

वरुण कुमार सखाजी said...

फोटो जितना बोल रहे हैं, उतना लेखन नहीं बोल सका। बहुत अच्छा कमल भाई।

Udan Tashtari said...

बेहतरीन/ सटीक!!