नारद: Nrendra modi
Showing posts with label Nrendra modi. Show all posts
Showing posts with label Nrendra modi. Show all posts

Sunday, February 16, 2014

असली नकली

"असली नकली" ये किसी बोलीवूड निर्देशक द्वारा निर्देशित कोई फिल्म नहीं है, बल्कि आजकल जनता, नेता, आमिर, गरीब, सजीव निर्जीव सब निर्देशक बन एक दुसरे को असली नकली का प्रमाण पत्र देने पे उतारू है, बस कंडीशन ये है की कंडीशन क्या क्या हो?  

आपके  पाले में  है तो असली है, दुसरे के पाले में है तो नकली है, या कुछ  यों कह ले की रूपये आपके जेब में है तो असली यदि दुसरे  के जेब में तो नकली, हम रईस तो व्हाईट मनी, वो रईस तो पक्का आपके  मन से भी काला  ब्लैक मनी,  असलियत चाहे जो कुछ भी हो उसमे आपना कीमती दिमाग जाया करने की जहमत कोई करना चाहता. दिमाग भी भला चलने की चीज है? अरे चलाना है व्यंग बाण चलिए, गाली चलाईये, धरना चलाईये, धरना के दौरान पुलिस पे पत्थर  चलाईये, और जब  पुलिस प्रतिक्रिया स्वरुप आप पे लाठी चलाये  तो आप पुनः अपने मूल रूप पे आके  पुरे जोश ए खरोश से, मुह से, दिल से, यहाँ से वहां से, जहाँ जहाँ से मन करे वहां वहां वहां से गाली चलाईये.  

आपका समर्थक है  तो असली देश भक्त, उनका है तो नकली वाला देश भक्त, नकली देशभक्त ?? नकली आदमी ? ये क्या होता है,  ये क्या कागज का होता है ? प्लास्टिक का होता है ? जुट का होता है ?  पटसन का होता है ? आदमी ही होता है ?? खैर भगवान् वो आपके हिसाब से जाने क्या होता है लेकिन इतना  तय है की वो आपके साथ नहीं तो आम आदमी नहीं, और आप आपके साथ है, आप आप है, गधे के भी बाप है लेकिन फिर भी असली है.

 गधे  के बाप यों की  आप नेता है, और नेता के लिए जनता बाई डिफाल्ट गधा ही होता है,  वास्तव में गधे जब प्रमोट हो जाए तो नेता होते है. आजकल कुछ गधे समूह बना कर नेता बन गए सो फाइनली वो प्रमोट हो के नेता है लेकिन वही ढाक के तीन पात गधो  के भले के नाम पर गधो को गधा बनाकर खुद गधे  से नेता बन बैठे, गधे बिचारे  फिर छले जा चुके है. ता अपने आप को सबका बाप समझते है की कोई गधा जब आपके पास आ जाता आप उसके सामने तत्काल दो मुठ्ठी अपना चारा छेंट देते है और यदि वो खा ले तो  टनाटन बुध्धिमान हो जाता है और तत्काल आपकी तरफ से बुध्धिमान का प्रमाण पत्र उसके गले में लटका दिया जाता है. वो गधा आपके सामान पवित्र और बुध्दिमान बन चूका है, वह कुछ भी ढेंचू ढेंचू करे पब्लिक को वाह वाह कहना ही  चाहिए अन्यथा पब्लिक अथवा गधा आटोमेटिक बाईडिफाल्ट  गधा है, भ्रष्टाचारी है, कमीना है,  कल को वही गधा आपके बड़े मुह या  आपके छोटे दिमाग के स्थान (सर )  पर दुल्लती मार दे तो आप तत्काल उसे अपनी रूहानी शक्तियों उसे उसका असली रूप बता देते हैं, तब गधा गधा देंछु ढेंचू करने लगते है और वो भी आपको गधा गधा ढेंचू  करते हैं. खैर वो आपका आपस का भाई चारा है, होता रहता है . 

यही बात आजकल धर्म बनाम पार्टी पे लागू है, आजकल कुच्छ अतिवादी (आप इन्हें अन्मैचोर भी कह सकते है) लोग किसी को सच्चा या झूठा मुसलमान का सर्टिफिकेट बाँट रहे है, सिर्फ़ इस आधार पर की वो किसको सपोर्ट करता है? वो किस पार्टी का है ? (हर जगह इस तरह एक लोग है) नक़वी जी और शाहनवाज़ को कॉंग्रेस समर्थक मुसलमान नकली कहते है, जबकि भाजपा समर्थक कॉंग्रेस मुस्लिम नेताओ को च्छद्म सेकुलर (कुच्छ हद ये सही भी है ) लेकिन असली नकली का स्रटिफिकेट कैसे देते हैं वो... मुझे समझ नही आता ?? कोई आपके पाले मे है तो असली, उनके पाले मे है तो नकली ? भाई पाला / पार्टी नही आदमी देखो . 
मै असदूद्दीन ओवैसी (बड़े वाले का छोटे का नही ) का भी उतना ही फ़ैन हू जितना मोदी का. 

मै कोंग्रेस के मदीनी जी का भी फैन हूँ , किसी मै सिर्फ इसलिए देश द्रोही या नकली नहीं कह सकता क्योकि वो मोदी विरोधी है .. मोदी विरोधी होना देश विरोधी नहीं है भाई , हो सकता है एक समय मे वो मोदी के नजदीक भी आ जाये तब अब आप क्या उनका नकली वाला सर्टिफिकेट सरेंडर करवा दुबारा असली इस्सु करेंगे ?? अरे ये पोलिटिक्स है भाई, भाजपा निश्चित रूप से आज के समय मे धर्म निरपेक्ष है बाकी पार्टियों की अपेक्षा लेकिन दूसरी पार्टी के लोगो को इस तरह का प्रमाणपत्र दे के अपना कागज़ और दिमाग न खराब करे|

मै मुस्लिम तुष्टिकरण का विरोध करता हू, मुस्लिम का नहीं

और अंत मे सबसे बड़ी बात इन फर्जी सर्टिफिकेट बाटने वालो फर्जी लोगो को तत्काल "असली" १००% या २४ कैरेट संघी होने का सर्टिफिकेट तथाकथित "फर्जी बुद्धजीवियों" से भी मिल जाता है - फ्री मे. 

इस प्रकार के नेतावो/ लोगो से आग्रह है की "आप" कुछ "उस" प्रकार के सिनेमा को "यू" सर्टिफिकेट दे के देखे, काम करता है या नहीं ? 

इती श्री प्रणाम पत्रं अथ कथा:
सादर

कमल कुमार सिंह
१६ फरवरी २०१४ 

Saturday, January 18, 2014

चिंता

बड़े बड़े  बुध्ध्जिवियो/ पत्रकारों / बड़े वालो / सेकुलरों/ आकश / पाताल/ बैताल, सभी से आग्रह है आप लोग कुछ करें, संघ से आप लोग दुखी है, संघ ने दुखी कर रखा है आपको, संघ बिल्ली है, चुपके सी आके आपके घर की दूध पि जाती है, और आप चाय से वंचित रह जाते है, संघ के लोग आपका बीडी छीन के पि जाते है, निश्चित ही ये दुःख की बात है, संघ के लोग आपके घर आके, खाना पीना भी भाभी/ माताजी जी से छीन छान  के खा जाते होंगे, निश्चित ही यह अक्षम्य पाप है.

चिड़िया जब आपके  सर पे बीट कर दे तो आप समझ ले यह पूर्व जन्म का संघी है और आपको पहचान गया है, इसलिए पको निशाना बनाया गया.  इस तरह की आपात स्थिति  से निपटने के लिए गुलेल हमेशा साथ रखे. निशाना गड़बड़ हो तो उसे गन्दी गन्दी गालिया सुना के गन्दी गन्दी गालिया देने वाला कहें, उसके कान फाड़ दे जिससे वो अपनी तरफ आने वाली प्लेन की आवाज नहीं सुन पायेगा और टकरा के मर जाएगा.

ये संघी किसी भी रूप में हो सकते है, पेड़ के रूप में, पौधे के रूप में, यदि किसी नीम से आप दातुन तोड़े और वो कड़वा हो तो समझ ले की नीम संघी है, तत्काल मुह धो के पेड़ को अपने मुख मुद्रा से अभिमंत्रित शुद्ध ५००१ गाली दे और तत्काल आरी चलवा दें.

चलते फिरते समय हमेशा ध्यान रखे की किसी संघी से न टकरा जाय, बस ट्रेन में चलत समय ख़ासा सावधान रहे, संघियों का प्रकोप यहाँ भी हो सकता है, मान लीजिये बस खराब हो जाए तो आप समझ ले की इसमें संघियों की साजिश है की आपने गंतव्य पे लेट पहुचें, या ये भी हो सकता है की अमुक गाडी किसी संघी के शो रूम की हो , नहीं तो कम से कम बेचने वाला सेल्स मनेजर जरुर संघी ही होगा, अन्यथा आपको इतना कष्ट देने की जोखिम क्यों उठाता जिससे  दुनिया दुखी है.

कुछ भी करते या लेते ससमय ध्यान रखे की उसमे संघी की साजिश न हो, मसलन पास के किराना स्टोर यदि किसी संघी का हो तो आपके पेट में अल्सर पड़ सकते है, या आपका पेट ख़राब हो सकता है, यदि एसा होता है तो आप तत्काल उसके घर के उलटे अपना मुह कर वायु शंका निवारण करें. संघी किसी भी रूप में हो सकते हैं, उनको पहचानने का सबसे सरल उपाय ये है की यदि कोई पशु पक्षी, मानव लोजिकल बात करे या आपके खिलाफ बात करे तो आप समझ लें की ये संघी हो सकता है. 

वैसे आप चाहे तो इस क्रिया से अपना व्यक्तिगत लाभ ले सकते हैं, मसलन जब चाय पीनी हो या दूध गरम करनी हो तो किसी संघ को आवाज लगा उसको छत पर बुला लें फिर उसे देख  चाय का पतीला अपने दिमाग या पीछे रख बिना गैस खर्च किये  गरम कर सकते हैं. ठण्ड के मौसम में अपमे गुसल खाने में किसी संघी की फोटो लगाए आपका शरीर जल रहा होगा, अतः पानी गर्म करने की जरुरत नहीं. ये सब उपाय मै इसलिए  बता रहा हूँ की सोते से खाते से, और बाकी सब भी करते समय आपके दिमाग से संघ का भुत वैसे भी नहीं उतर .
सच बात तो ये है आपका खाना, हसना रोना, या ये कह लें की भविष्य तक संघ और संघियों पे निर्भर है.
 तो बेहतर है कुछ ाव्यक्तिगत लाभ भी उठायें .

कृपया कुछ करें, आप जिस तरह से रुद्राक्ष की माला ले सुबह शाम संघी संघ कर वायु में उसका "कोसना" की मात्र बढ़ाते जाते हैं वह सेकुलरो, बुध्जिवियोंके लिए चिंता का विषय इसलिए है की उनका विष भरा नाम वायु में घुल इस जमात की जान ले सकता है अतः चिंता का विषय इसलिए इसलिए की आपके इस रुद्राक्ष युक्त मारक कोसने से से उनके स्वाथ्य पे कोई असर नहीं पड़ता, वो आपके तरफ देख मुस्करा देते आर आप फिर से जल भुन कर वायु  में कार्बन डाई आक्साईड की मात्रा बढ़ाते है जिससे ओजोन हर दिन अपना अंतिम दिन मानता है , इधर आप घुट रहे हो उधर आपके क्रियाकलाप से ओजोन. दोनों की चिंता समाप्त करने का उपाय खोंजे बजाय की अपना जी और ओजोन को डराने के.

एक "संघ निवारण संघ" बना के भी इनसे निपटा जा सकता है, इसके लिए मुलायम, माया, या नवजोत "आपा" का सहारा ले सकते है. कुछ काम और कियें जा सकतें है मसलन उनके पीछे कुत्ते छोड़ दें लेकिन उसका कोई फायदा नहीं वो दिन रात आप लोगो को तो देखते ही है, प्लेन चिट चलवा दें, अंडा कटवा दें, जिन्न छोड्वा दें, या बाबा बंगाली से के पास उन संघीयों की फोटो ले के चले जाए या सामूहिक आहुति यग्य करावा दें, कुछ न कुछ तो होगा ही.
पीपल के पेड़ में "सुबह का"  पानी  डालने से भी लाभ होगा, कर के जरुर देखें, यदि लाभ न हुआ तो समझ लें की संघियों की साजिश है.


आप जिस तरह से दिन ब दिन दुबले होते जा रहे हैं वो खासा चिंताजनक है, इससे आपका मानसिक संतुलन खराब हो सकता है, पेट दर्द, सिरद, निमोनिया इत्यादि आप पर हमला कर अपना नुक्सान करवा सकते है.  बिना संघियों को ठिकाने लगाये इस तरह से दिन रात हुक्के की तरह गुड्गुडाने से आपका कोई फायदा होता नहीं दिखता. कृपया कुछ करें. 

आपका एक संघी शुभचिंतक 

सादर 
कमल कुमार सिंह
१८ जन २०१४ 

Wednesday, October 30, 2013

बपौती



बपौती काई प्रकार कि होती है, एक तो  बाप का माल, हलाकि जो ये समझता है वो खुद भी अपने बाप का माल ही होता है भले वो अपने आपको बाप का माल समझे या नहीं या अपने बाप को ही घुड़क दे, लेकिन बाकी वस्तुवो को बाप का माल समझने वाला एक खास किस्म का दिमागी योध्धा होता है, जो बिना किसी से लड़े ही सबको अपने बाप का माल मानता है। 

जैसे किसी ज़माने सवर्ण दलित को अपने बाप का माल समझता था, मुसलमान कुरआन और मोहम्मद को अपने बाप का माल समझता है, आशाराम अपने महिला  भक्तो को अपने बाप का माल समझते है, बोस अपने मातहत को अपने बाप का माल समझता है, पुरुष स्त्री को अपने बाप का माल समझता है, स्त्री पुरुष  के माँ बाप को अपने बाप का माल समझती है,  दलित वाल्मीकि जी  को अपने  बाप का माल समझता है, सवर्ण परशुराम को अपने बाप का माल समझता है, कुत्ता तक दूसरों के जूठन को अपने बाप का माल समझता है। यानि सबके बाप के माल केटेगराईज्ड है। 

इसी कड़ी में नेता सबको धता बना अपना प्रथम स्थान बार बार लगातार कायम किये रखे हुए है, नेता मुसलमान के वोट को अपने बाप का माल समझते है। इसी परम्परा को को आगे  बढ़ाते हुए अपने प्रधान मंत्री मनमोहन जी मंद गति से  व्याख्यान दिया कि सरदार पटेल कोंग्रेस के थे, पहली बात मनमोहन जी जिस जनता को आप और आपके कोंग्रेस "आई" पिछले 40  सालो से बेवकूफ बना रहे है कि आप कोंग्रेसी हो  तो यही पे आपकी जबान लड़खड़ा जानी चाहिए थी . जिस कोंग्रेस का होने का दम आप भरते हो तो इंद्रा जी ने सिंडिकेट के खिलाफ हो कोंग्रेस से अलग हो कोंग्रेस आई बना डाली थी, यानि तलाक ले के एलुमनी लेने के बाद भी दौलत पे बारबरा नजर बनाये हैं आप जो गैर कानूनी है, इसी प्रकार से कोंग्रेस से अलग हो श्यामा  प्रसाद मुखर्जी ने इंद्रा से पहले ही आर एस एस बनाया था, तो सरदार पटेल, कोंग्रेस "आई" अर्थात आपके कैसे हुए ?  ? ये तो हुयी ओछी बात का जवाब ओछी बात से . 

अब आगे बढ़ते है, प्रधान मंत्री जी कुछ दिनों पहले मोदी ने अपने मंच से कहा था , आप से विचारो कि लड़ाई हो सकती है लेकिन आप अभी हमारे प्रधान मंत्री है, तो क्या आपने ये साबित नहीं  कर दिया कि आपका कद और दिल भी प्रधान मंत्री हो के भी मोदी से बहुत छोटा है जो कि महापुरुषो को खेमे में बाँट रहे है। क्या आप ये कह रहे है कि आपको प्रधान मंत्री इस देश का नहीं बल्कि कोंग्रेस का माना जाना चाहिए ? क्या आप ये कहना चाहते है  कि भाजपा, और गैर कोंग्रेस दल आपको प्रधान मंत्री मानने से इंकार दे ? 

आप इस देश के प्रधानमंत्री है, टी वी पे आके रात के अंधेरो के मालिक  सिंघवी ब्रांड टाइप का ओछा बयांन  देना कौन सा बड्डप्प्न है? 

खैर  इससे जादा आपसे जादा आशा कि भी नहीं जा सकती थी, क्योकि जिस राजीनीतिक दल से आप हो वहाँ सिक्का (खोटा  ही सही ) बस एक परिवार का चलता है, नकली गांधी परिवार का असली महात्मा गांधी के अभी जीवित चिराग तुसार गांधी किस चिड़िया का नाम है देश का अस्सी प्रतिशत युवा नहीं जानता होगा. नकली गांधी  पुरे देश को अपने बाप का माल मानता है, तभी इंद्रा देश कि बेटी हो गयी और राजिव देश का बेटा , सोनिया देश कि बहु हो गयी (कोंग्रेसियो कि नजर में ) और राहुल देश का पप्पू, राहुल को पता है कि वो पप्पू है फिर भी देश पे अपने अधिकार जताने से नहीं चुक रहे, मुसलमान तो उनके बाप के नौकर के  माल है
माना कि कोंग्रेस देश को अपनी बपौती मान  खूब ,कोयला , जमीं आसमान हवा सब बेच रही है,  आप लोग आपने राजीनीति के लिए कुछ भी करते रहिये कोई आपत्ति नहीं, कम से कम अब महापुरुषो पे एकाध्किार तो छोड़िये महाराज, नहीं तो गैर कोंग्रेसी दल आपको अपना प्रधान मंत्री मनाने से खारिज कर देंगे तब मत रोइएगा और न ही डुबियेगा,  चुल्लू भर पानी में। 

मेरा इस तरह का कुछ भी लिखने का रत्ती भर मन  नहीं था मनमोहन जी, लेकिन आप अपने आपको शायद देश का प्रधान मंत्री बाद, पहले कोंग्रेसी मानते हो, तो इस तरह का कुछ तो बनता ही था. 

आज सादर भी लिखने का मन नहीं कर रहा, यूँ ही लिख देता हूँ नीचे अपना नाम .

कमल कुमार सिंह 

Saturday, September 1, 2012

न्यायप्रिय मोदी


देश के  इतिहास मे पहली बार किसी को  साम्प्रदायिक सामूहिक  हिंसा के अपराध पे  सजा हुयी है, भले ही ये हिंसा किसी दूसरे साम्प्रदायिक गिरोह के प्रतिक्रिया स्वरुप हुयी हो. 
जहाँ आजकल सत्ताधारी अपने अपने मंत्रियो को एक केन प्रकारेण बचाने की सारी जुगत भिड़ा देते हैं, न्याय प्रक्रिया मे बाधा पहुचातें हैं वही  मोदी जी ने बता दिया की अपराध के लिए गुजरात मे कोई स्थान नहीं है है भले ही वो उनका मंत्री हो. वो चाहते तो शायद न्याय व्यवस्था मे दखल दे सकते थे , जैसा की कोंग्रेस आज तक करती आयी है, लेकिन नहीं, कोई भी जगह सभी धर्मो का है , मानने वाले मोदी जी ने अपने आपको इससे दूर ही रखा. वो बात अलग है की जेहादी मुसलमान बस इस्लाम मनता है , धर्म मानता है न की देश या जगह. 

एक तरफ मोदी जी की गुजरात सरकार है जो षड्यंत्र मे शामिल होने वालो को नहीं बख्शा , वही दूसरी तरफ एक कोंग्रेस की नेता फौजिया खान है जिन्होंने आतंकवादी आबू को अपने यहाँ पनाह दी थी लेकिन किसी ने चूं तक न की, न ही सेकुलरों ने न ही मिडिया ने, करे भी क्यों ?? इस्लाम या इस्लामी आतकवाद के  खिलाफ बोल के भाई चारा थोड़े न कम करना है, उनके ऊपर कार्यवाही भी शायद ही हो.    

अब पहले जान लिया जाए की बजरंगी जैसे लोगो कि उत्त्पत्ति कैसे होती है ?? 

महान वैज्ञानिक न्यूटन के बहुत सालो पहले एक नियम दिया था, "क्रिया प्रतिक्रिया का नियम"  या आईन्स्टीन ने सापेक्षवाद का नियम दिया था, यानि चीजे तभी संतुलित हो सकती है जब क्रिया बराबर हो नहीं तो जहाज  डूब जायेगा. 

गोधरा मे जब कार सेवको कोमुसलमान समुदाय द्वारा जिन्दा जला दिया गया, तो बजरंगी जैसे आदमी ने अपनी प्रतिक्रिया दी, मै हिंसा की वकालत बिलकुल नहीं करता, लेकिन कहा गया है की क्रोध मे आदमी अपने सगे तक को भूल जाता है, वो तो सामूहिक हिंसा थी. 

ये भी ध्यान हो , सिख्ह भाईयों के ऊपर किये गए अत्याचार पर भी अत्याचारियो को कोई सजा अभी तक नहीं मिल पायी है, जबकि बड़ी बेशर्मी से राजीव गांधी द्वारा का दिया  गया था की "जब कोई बड़ा पेड गिरता है तो हलचल होती ही है" 

ध्यान रहे की कश्मीर से भगाए गए पंडितो को भी आज तक कोई न्याय नहीं मिल पाया है और आजतक वो भाता रहे है. 

 ध्यान देने योग्य बात है की मुंबई के अमर जवान ज्योति को तोडने वाला जब  गिरफ्तार किया जाता है तो कोंग्रेस सरकार का एक कमिश्नर गिरफ्तार करने वाले को गन्दी गन्दी गालियाँ देता  है. 

ध्यान देने योग्य बात है की प्रतापगढ़ मे बाल्त्कारी को सजा दिलवाने से पहले कोंग्रेस समर्थित सपा के मंत्री पहले बाल्त्कारियो और उनके समुदायों को राहत और मुवावजा देने की बात करते है . 

ध्यान देने योग्य बात है की शिव भक्त कावड़ियों पर हमला करने वालो के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं बल्कि उलटे हिंदू समुदाय के लोगो को जेल मे ठूंसा जाने लगता है . 

ध्यान देने योग्य बात है की नमाज के लिए एक गुरु द्वरा तो मुसलमानों का स्वागत कर देता है लेकिन यही मुसलमान, अपनी मस्जिद मे पनाह लिए हुए हिन्दुओ को निकाल भगाया था, और मरने के लिए छोड़ दिया. 

ध्यान देने योग्य बात है की मायावती अपनी मूर्ति के लिए हाय तौबा तो मचाती है और सपा सरकार तत्काल कार्यवाही करती है, लेकिन उन्ही के भगवान  बुध्ध की मुर्ती तोड़ दी जाती है, जबकि सत्ता और मिडिया खामोश मूर्ति बनी रहती है. 

ध्यान देने योग्य बात है पुणे के बम विस्फोट मे शक जब  दयानंद पे गया जो की निराधार था तो, सरकार ने उसको गिरफ्तार किया और मिडिया ने खूब उछाला, जबकि तबी इस्लामी संघटन की बात सिद्धद होते ही सरकार और मिडिया दोनों चुप हो गयी. 

इतने दोहरे मानक वाले सत्तावों  के बीच मोदी जी ने ये सिध्ध कर दिया है की असली निरपेक्षता क्या होती है. 

भगवन से अब यही प्रार्थना है की दुबारा इस्लाम प्रायोजित कोई दंगा न हो और किसी दूसरे बजरंग को न पैदा करे. यदि दुबारा कुछ ऐसा हुआ तो बजरंग जैसे लोग भी पैदा होंगे ही और इसमें किसी का कोई दोष नहीं होगा.