नारद: manmohan singh
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Wednesday, October 30, 2013

बपौती



बपौती काई प्रकार कि होती है, एक तो  बाप का माल, हलाकि जो ये समझता है वो खुद भी अपने बाप का माल ही होता है भले वो अपने आपको बाप का माल समझे या नहीं या अपने बाप को ही घुड़क दे, लेकिन बाकी वस्तुवो को बाप का माल समझने वाला एक खास किस्म का दिमागी योध्धा होता है, जो बिना किसी से लड़े ही सबको अपने बाप का माल मानता है। 

जैसे किसी ज़माने सवर्ण दलित को अपने बाप का माल समझता था, मुसलमान कुरआन और मोहम्मद को अपने बाप का माल समझता है, आशाराम अपने महिला  भक्तो को अपने बाप का माल समझते है, बोस अपने मातहत को अपने बाप का माल समझता है, पुरुष स्त्री को अपने बाप का माल समझता है, स्त्री पुरुष  के माँ बाप को अपने बाप का माल समझती है,  दलित वाल्मीकि जी  को अपने  बाप का माल समझता है, सवर्ण परशुराम को अपने बाप का माल समझता है, कुत्ता तक दूसरों के जूठन को अपने बाप का माल समझता है। यानि सबके बाप के माल केटेगराईज्ड है। 

इसी कड़ी में नेता सबको धता बना अपना प्रथम स्थान बार बार लगातार कायम किये रखे हुए है, नेता मुसलमान के वोट को अपने बाप का माल समझते है। इसी परम्परा को को आगे  बढ़ाते हुए अपने प्रधान मंत्री मनमोहन जी मंद गति से  व्याख्यान दिया कि सरदार पटेल कोंग्रेस के थे, पहली बात मनमोहन जी जिस जनता को आप और आपके कोंग्रेस "आई" पिछले 40  सालो से बेवकूफ बना रहे है कि आप कोंग्रेसी हो  तो यही पे आपकी जबान लड़खड़ा जानी चाहिए थी . जिस कोंग्रेस का होने का दम आप भरते हो तो इंद्रा जी ने सिंडिकेट के खिलाफ हो कोंग्रेस से अलग हो कोंग्रेस आई बना डाली थी, यानि तलाक ले के एलुमनी लेने के बाद भी दौलत पे बारबरा नजर बनाये हैं आप जो गैर कानूनी है, इसी प्रकार से कोंग्रेस से अलग हो श्यामा  प्रसाद मुखर्जी ने इंद्रा से पहले ही आर एस एस बनाया था, तो सरदार पटेल, कोंग्रेस "आई" अर्थात आपके कैसे हुए ?  ? ये तो हुयी ओछी बात का जवाब ओछी बात से . 

अब आगे बढ़ते है, प्रधान मंत्री जी कुछ दिनों पहले मोदी ने अपने मंच से कहा था , आप से विचारो कि लड़ाई हो सकती है लेकिन आप अभी हमारे प्रधान मंत्री है, तो क्या आपने ये साबित नहीं  कर दिया कि आपका कद और दिल भी प्रधान मंत्री हो के भी मोदी से बहुत छोटा है जो कि महापुरुषो को खेमे में बाँट रहे है। क्या आप ये कह रहे है कि आपको प्रधान मंत्री इस देश का नहीं बल्कि कोंग्रेस का माना जाना चाहिए ? क्या आप ये कहना चाहते है  कि भाजपा, और गैर कोंग्रेस दल आपको प्रधान मंत्री मानने से इंकार दे ? 

आप इस देश के प्रधानमंत्री है, टी वी पे आके रात के अंधेरो के मालिक  सिंघवी ब्रांड टाइप का ओछा बयांन  देना कौन सा बड्डप्प्न है? 

खैर  इससे जादा आपसे जादा आशा कि भी नहीं जा सकती थी, क्योकि जिस राजीनीतिक दल से आप हो वहाँ सिक्का (खोटा  ही सही ) बस एक परिवार का चलता है, नकली गांधी परिवार का असली महात्मा गांधी के अभी जीवित चिराग तुसार गांधी किस चिड़िया का नाम है देश का अस्सी प्रतिशत युवा नहीं जानता होगा. नकली गांधी  पुरे देश को अपने बाप का माल मानता है, तभी इंद्रा देश कि बेटी हो गयी और राजिव देश का बेटा , सोनिया देश कि बहु हो गयी (कोंग्रेसियो कि नजर में ) और राहुल देश का पप्पू, राहुल को पता है कि वो पप्पू है फिर भी देश पे अपने अधिकार जताने से नहीं चुक रहे, मुसलमान तो उनके बाप के नौकर के  माल है
माना कि कोंग्रेस देश को अपनी बपौती मान  खूब ,कोयला , जमीं आसमान हवा सब बेच रही है,  आप लोग आपने राजीनीति के लिए कुछ भी करते रहिये कोई आपत्ति नहीं, कम से कम अब महापुरुषो पे एकाध्किार तो छोड़िये महाराज, नहीं तो गैर कोंग्रेसी दल आपको अपना प्रधान मंत्री मनाने से खारिज कर देंगे तब मत रोइएगा और न ही डुबियेगा,  चुल्लू भर पानी में। 

मेरा इस तरह का कुछ भी लिखने का रत्ती भर मन  नहीं था मनमोहन जी, लेकिन आप अपने आपको शायद देश का प्रधान मंत्री बाद, पहले कोंग्रेसी मानते हो, तो इस तरह का कुछ तो बनता ही था. 

आज सादर भी लिखने का मन नहीं कर रहा, यूँ ही लिख देता हूँ नीचे अपना नाम .

कमल कुमार सिंह 

Friday, September 21, 2012

गैर के बहकावे में न आयें (ये काम हमारा है)


थर्ड डीग्री से तो गूंगा भी बोलता है,  जब यू पी ए की सरकार को लगा की अबकी जनता का डंडा तगड़ा लगाने वाला है तो उन्होंने अपने हर अवसर पर मौन रहने वाले मौन मोहन सिंह को "सेट" कर उनके स्वभाव के विपरीत फिर बोलने के लिए मजबूर कर दिया. 

सेटिंग में वैसे भी कोंग्रेस पुरोधा है,  पहले तमाम दल "सेट" कर सरकार बनाई, फिर सेट्टिंग को खुश रखने के लिए घोटाले किये, घोटालो को सेट करने के लिए मिडिया का सहारा लिया, बाद में जनता का ध्यान सेट करने के लिए महंगाई बढ़ाया फिर जनता की 'जान'  "सेट" करने के लिए ऍफ़ डी आई ले आया.  आजकल के मजनुवो को सरकार से सेटिंग की सीख लेनी चाहिए. जब जनता जान गयी की सरकार अब जनता की "जान" सेट करने वाली है तो जनता को सेट करने के लिए सोनिया ने मनमोहन को उनके स्वभाव के  विपरीत सेट कर टी वी सेट पर भेज दिया.

अपने स्वभाव के विपरीत  वो बोले तो सही लेकिन अपनी मौलिक रोबोटावस्था में, अब आदमी अपने स्वभाव  से कहाँ कहाँ "कोम्प्रोमाईज" करे ?? कुछ तो मौलिक होना चाहिए, माना  की सोनिया जी के निर्देश से बोले, माना की उनका लिखा हुआ भी बोले, सिर्फ भाव भंगिमा ही थी जो अपनी खुद की अपनाई जा सकती थी, सो जहाँ "स्पेस" मिला मौलिकता सेट कर दी.  

सरकार की गृहस्थी चलाने के लिए मनमोहन ने अब तक ममता को "सेट" कर रखा था, "मायके" से बुला  "ससुराल" में रखा, लेकिन हर सेटिंग डिमान्डिंग होती हैं भाई, खर्चीली होती है, आजकल महगाई के जमाने में सेट्टिंग करना  इतना आसान नहीं लेकिन सरकार ने कर दिखाया. ममता का मन  मनमोहिनी सरकार से टुटा तो सरकार को भी दिक्कत नहीं हुयी, आजकल लोग कई कई सेटिंग रखते हैं भाई. ममता के बारे में पूछे जाने पर कोंग्रेस कहती है हम उनकी आज भी इज्जत करते है ,हमेशा दरवाजा खुला है, उनका अपना  मुद्दा है ,"मतभेद है -मनभेद नहीं " इस पर मुझे सुनील जी की पंक्तिया याद आती है :- 

मैंने आज तक उसको, 
कभी  बेवफा कहा ही नहीं |
मगर वफ़ा की बात हो तो ,
उसका ज़िक्र भी अच्छा नहीं लगता |
ज़रूर उसकी बेवफायी भी
एक मज़बूरी रही होगी |
मेरे इस भरम का टूटना भी , 
मुझे कभी अच्छा नहीं लगता |(सुनील)

मनमोहिनी सरकार की वेवफाई से रूठ ममता जैसे ही वापिस "मायके" गई  "मुलायम" से नैना चार हो गए. अब सरकार चलाएगी मनमोहन और मुलायम की सेटिंग, खैर आजकल तो पुरुष का पुरुष से सेट्टिंग भी मान्य है. (आजकल सब मान्य है, कोर्ट का आदेश भी तो है इस पर ) सरकार ने गृहस्थी चलाने के लिए ढूँढा भी तो मुलायम जैसा गर्लफ्रेंड जो सरे आम कहती है मै "तीसरे"को जाउंगी, जो तेरा है वो मेरा है और जो मेरा है सिर्फ मेरा है,लेकिन सरदार के सरकार का दिल है की मानता नहीं.  

खैर जो भी हो प्रधानमन्त्री जी ने आज दिखा दिया की सरकार बुजदिल नहीं की जी जला के जिम्मेदारी भी न ले. ताल ठोक के बोला की छह सिलेंडर के बाद हम "ब्लैक"  करेंगे आप लोग इत्मीनान रखे, यदि नहीं रख सकते तो कोई बात नहीं, कम से कम दूसरो के बहकावे में न आयें क्योकि ये काम सिर्फ हमारा है, और  हमें आप पे भरोसा और  इत्मीनान  है की आप सिर्फ हमारे बहकावे में आएंगे और हमारा साथ दे हाथ मजबूत कर सकेंगे, और हम आपको विश्वाश दिलाते हैं की आने वाले दिनों में विकास की गति और जादा होगी, भले वो महगाई या घोटालो का विकास हो. अभी हमने ८% की डर से घोटाले कर महगाई  को विकसित किया है आने वाले दिनों में और भी उंचाइयां छूनी है, भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाना है , और वो तभी होगा जब हम भारत को किसी शक्तिशाली देश के हवाले कर देंगे. इतना सुनना ही था की माता जी की आवाज आई "बंद करो टी वी, 'दाढ़ीजरवा' बोल रहा है".   और मै माता जी के बहकावे में आ टी वी बंद कर दिया, आगे का भाषण आप लोगो ने सुना हो तो कृपया बताएं .